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वेद विद्या प्रसार न्यास
यथेमां वाचं कल्याणीमावदानि जनेभ्यः।
ब्रह्मराजन्याभ्यां शूद्राय चार्याय च स्वाय चारणाय च॥
(यजुर्वेद २६.२)
अर्थ: ईश्वर कहते हैं कि — "जिस प्रकार मैं इस कल्याणी (कल्याण करने वाली) वेदवाणी का उपदेश सभी मनुष्यों के लिए करता हूँ — ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र, वैश्य (आर्य), अपने आत्मीय जनों और अन्यों के लिए — उसी प्रकार तुम भी इस ज्ञान को सभी लोगों तक पहुँचाओ।"

वेद विद्या प्रसार न्यास वेद और आर्ष ज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए संस्थापित एक समर्पित जन कल्याणकारी संस्था है। इसकी स्थापना सन् २०२२ में प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में हुई।

मुख्य उद्देश्य

वेद और ऋषियों की पवित्र परंपरा का व्यापक प्रचार-प्रसार करना।
समाज में वेदोक्त धर्म का पालन स्वयं करना और दूसरों को इसके लिए प्रेरित करना।
वेद तथा ऋषि निर्मित सत्य शास्त्रों के पठन-पाठन हेतु गुरुकुलों की स्थापना करना।
समाज कल्याण हेतु अपेक्षाकृत संसाधनों से सामान्य जनों की सहायता करना।

प्रमुख गतिविधियाँ एवं सेवा कार्य

श्रेणीआयोजित कार्यक्रम एवं सेवा कार्य
धार्मिक एवं सांस्कृतिक
  • विश्व वेद सम्मेलन २०२४
  • २०१ कुण्डीय चतुर्वेद ब्रह्म पारायण महायज्ञ
  • १५१ कुण्डीय जन कल्याण महायज्ञ
  • निरंतर वेद पारायण यज्ञों का आयोजन
जन जागरण अभियान
  • 'वेद प्रचार आपके द्वार' अभियान
  • प्राकृतिक पदार्थों के सेवन की प्रेरणा
  • गौ आधारित कृषि का प्रचार व प्रसार
सामाजिक सेवा कार्य
  • निःशुल्क चिकित्सा शिविरों व योग प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन
  • गौमाता की सेवा हेतु गौशालाओं का संचालन
  • निर्धन व असहाय लोगों को वस्त्र वितरण
शिक्षा- संस्कृत एवं संस्कृति
  • गुरुकुलों का संचालन
  • संस्कृत सम्भाषण शिविरों का आयोजन
  • आर्य वीर दल शिविरों का आयोजन

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