जीवन परिचय

जन्म - १५/०७/१९६८(पन्द्रह जुलाई उन्नीस सौ अणशठ )
जन्मस्थान - ग्रा० औदहा पो०मायंग जि० सुलतानपुर (उ०प्र०)
प्रारम्भिक शिक्षा - प्राइमरी पाठशाला औदहा
प्रथम आर्यसमाज प्रवेश - आर्यसमाज मायंग (सुलतानपुर)
उच्च प्राथमिक शिक्षा - डी०ए०वी०स्कूल मझवारा (सुलतानपुर उ०प्र०)
माध्यमिक एवं स्नातक - आर्य गुरुकुल यज्ञ तीर्थ (एटा) में रहते हुए महर्षि दयानन्द विश्व विद्यालय रोहतक (हरि०) पूर्वमध्यमा (१८८५) उत्तरमध्यमा (१८८६) शास्त्री (१९८९) स्वर्णपदक सहित
परास्नातक - १. व्याकरणाचार्य (१९९१) महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक (हरि०) स्वर्णपदकसहित २. एम०ए० (वेद) (१९९३) महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक (हरि०)
३. साहित्याचार्य (१९९६) सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी (उ०प्र०)
पी०एच०डी० -संस्कृत व्याकरण (२००१)
बी०आर० अम्बेडकर वि०वि० आगरा (उ०प्र०)
विषय- महर्षि दयानन्द कृत आख्यातिक एवं माधवीय धातुवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन ।
शैक्षणिक कार्य – फरवरी १९९२ से जून १९९३ तक
“प्राध्यापक व्याकरण” महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ नोएडा (उ०प्र०)
जुलाई – १९९३ से जून २००२ तक “मुख्याध्यापक” आर्ष गुरुकुल यज्ञतीर्थ एटा (उ०प्र०)
जुलाई २००२ से मई २००६ तक “प्राध्यापक” अन्तर्राष्ट्रीय उपदेशक महाविद्यालय टंकारा (गुज०)
जून २००६ से अगस्त २००६ तक “व्याकरणशिक्षक”
गुरुकुल महाविद्यालय (अयोध्या)
०५ सितम्बर २००६ से अद्यावधि “आचार्य” – वेद वेदांग विद्यापीठ गुरुकुल आश्रम धनपतगंज सुलतानपुर (उ०प्र०)
✍️ लेखन कार्य –
प्रकाशित –
१. देवयज्ञ प्रकाश
२. ब्रह्मयज्ञ प्रकाश
३. पितृयज्ञ प्रकाश
अप्रकाशित–
१. हस्यव्यंग्य पञ्चाशती (संस्कृत पद्य)
२. अतिथियज्ञ प्रकाश
३. वेद स्वाध्याय (पंचभाग में )
सम्पादन कार्य – प्रतिमापूजन (डा. जितेन्द्र कुमार )
अनेक पत्र पत्रिकाओं में लेख एवं संस्कृत गीत
प्रचारकार्य – उत्तर प्रदेश , उत्तराखण्ड, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, जम्मूकश्मीर , मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, मद्रास, बिहार, बंगाल, उडीसा, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ, झरखण्ड, राज्यों में अनेक मञ्चों पर सहस्रशः वैदिक प्रवचन , संस्कारों में पौरोहित्य एवं वेदपारायण यज्ञों में ऋत्विज के रूप में समुपस्थिति ।
— वेद प्रचार आपके द्वार – कार्यक्रम अन्तर्गत गुरुकुल के आस पास के ग्रामों में सघन वेद प्रचार
सामाजिक सेवाकार्य –
१. शतशः वृक्षों का आरोपण
२. नन्द नन्दन गोशाला के माध्यम से गो संरक्षण
३. निर्धनों में वस्त्र वितरण
४. वृद्ध सम्मान के अन्तर्गत ग्राम-ग्राम में वृद्धों का सम्मान
विवाह ५. निर्धन अभिभावकों की कन्याओं का विवाह
६. बहुकुण्डीय यज्ञों द्वारा पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा
